सीएसआईआर - केन्द्रीय खाद्य प्रौद्योगिक अनुसंधान संस्थान
 सीएसआईआर-सीएफटीआरआई के विषय में
 विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र की नई उपलब्धियां
 मानव संसाधन विकास
 सेवाएं
 हमसे संपर्क करें
  Home
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र की नई उपलब्धियां

 

फ्रक्‍टोओलिगोसैकेराइड्स (FOS)

फ्रक्‍टोओलिगोसैकेराइड्स (एफओएस) एक ऐसा प्रीबायोटिक है जो कि शरीर के लिए हितकारी होने के साथ कई खाद्यान्‍नों की गुणता को बढ़ाने में सक्षम है। ये ओलिगोसैचेराइड्स सक्रोज़ पर एफटेस के ट्रांसफ्रक्‍टोसाइलेशन के उत्‍पाद हैं। 50 किलोग्राम के स्‍तर पर एफओएस के उत्‍पादन की प्रक्रिया विकसित की गई जिसमें एफओएस का 52-54% उत्‍पाद प्राप्‍त हुआ। विकसित एफओएस बाज़ार के सैंपल के साथ तुलनीय था। एफटेज़ के उत्‍पादन के लिए प्रयुक्‍त एस्‍पर्जिलस ओराइजी एमटीसीसी 5154 एक ग्रास (जीआरएएस) सुरक्षित फंगस है जो कि नियामक रूप से लाभदायक है। इस प्रक्रिया का वाणिज्‍यीकरण कर दिया गया है।

शुद्ध नारियल तेल

तापीय विधि का प्रयोग किए बिना ताज़े नारियल से निकाला गया शुद्ध तेल रंगहीन और नारियल के तीव्र गंध वाला होता है। प्रचुर मात्रा में लॉरिक फैटी एसिड युक्‍त इस उत्‍पाद में विटामिन ई होता है और इसका प्रयोग कई औषधियों और कॉस्‍मेटिकस में किया जाता है। इसका पराक्सिडेज़ मूल्‍य 1 से कम और एफएफए 0.2% से कम होता है। यह उत्‍पाद मक्‍खन, मार्गारिन तथा खाना पकाने वाले तेल का सक्षम विकल्‍प माना जाता है। इस प्रौद्योगिकी का वाणिज्‍यीकरण कर दिया गया है।

शैवाल से बायोमास

शैवाल के स्रोतों से प्राप्‍त बायोमास का खाद्य तथा अन्‍य गैर खाद्य पदार्थों में प्रयोग के लिए जाना जाता है। नई विशेषताओं के साथ इनकी बाह्य खेती को प्रयोगशालाओं में मानकीकृत किया गया है। इनमें उच्‍च जैव उपलब्‍धता के प्रचुर मात्रा में लौह युक्‍त स्पिरुलिना, ड्युनालिला बीटा कैरोटिन समृद्ध स्रोत, हेमाटोकोकस प्‍लुवियालिस – एस्‍टाज़ैंथिन का स्रोत और हाइड्रोकार्बन स्रोत के लिए बाट्राइकोकसब्राउनी सम्मिलित हैं। इनमे से कुछ को उद्योगों में भेज दिया गया है।

जैवपृथक्‍करण एवं डाउनस्‍ट्रीम प्रसंस्‍करण

जैव प्रौद्योगिकी तथा जैव रासायन अभियांत्रिकी में जैवपृथक्‍करण एवं डाउनस्‍ट्रीम प्रसंस्‍करण का प्रमुख स्‍थान है और एक्‍कस टू फेज़ एक्‍स्‍ट्रैक्‍शन (एटीपीई) का अधिकतर प्रयोग विभिन्‍न स्रोतों से प्रोटीन के निष्‍कर्षण व शुद्धिकरण के लिए किया गया है। फाइकोबिलिप्रोटीन, एन्‍थोसायनिन तथा सी-फायकोसायनिन जो कि प्राकृतिक आहारीय रंगक होने के साथ स्‍वास्‍थ्‍य के लिए हितकारी है, का प्रयोगशाला में शुद्धिकरण और सांद्रण की एटीपीई आधारित प्रक्रिया द्वारा अधिक शुद्धता के साथ प्राप्‍त किया गया है और ये वाणिज्‍यीकरण के लिए तैयार है।

न्‍यूट्रास्‍यूटिकल युक्‍त तेल

न्‍यूट्रास्‍यूटिकल तेल उपलब्‍ध करने के लिए ओराइज़ेनाल, बीटा-कैरोटीन, टोकोफेरोल, टोकोट्रिनोल तथा लिग्‍नान  मिश्रण युक्‍त, लाइपेज उत्‍प्रेरित एस्‍टरिफिकेशन प्रक्रिया का प्रयोग किया जाता था। विभिन्‍न मसालों से बायो ओलियोरेज़ि‍न तैयार करने हेतु उच्‍च कोटि के उपज प्राप्‍त करने के लिए एन्‍ज़ाइमेटिक तरीकों का प्रयोग किया गया है।

खाद्य सुरक्षा

जनसाधारण को बेहतर खाद्य सुरक्षा प्रदान करने के लिए कई वैश्‍लेषणिक पद्धतियां विकसित की गई हैं। इनमें प्रसंस्‍कृत खाद्य पदार्थों में डीएनए आधारित प्रोटोकॉल द्वारा संदूषण की पहचान करना, बायोसेंसर आधारित कीटनाशकों के अवशेषों की पहचान करना और खाद्य पदार्थों से उत्‍पन्‍न अन्‍य कई पैथोजन की पीसीआर आधारित पहचान करना सम्मिलित है।

गन्‍ने के रस का बोतलीकरण

अमादक पेय तथा फलों से बने पेय के लिए भारत एक सक्षम बाज़ार प्रदान करता है। गन्‍ने के उत्‍पादन में ब्राज़ि‍ल के बाद भारत का दूसरा स्‍थान है। देश में उत्‍पन्‍न सारा गन्‍ना चीनी के मिलों द्वारा लिया नहीं जाता, इसका लगभग एक तिहाई भाग गुड़ और खंडसारी के उत्‍पादन के लिए प्रयुक्‍त होता है। इन उत्‍पादों की बाज़ार में इतनी मांग नहीं होती। इससे गन्‍ने को अन्‍य कार्यों के लिए एवं अन्‍य तरीकों से उपयोग में लाने की आवश्‍यकता उत्‍पन्‍न होती है। इसी वजह से गन्‍ने के रस का बोतलीकरण करके पेय के रूप में प्रयोग करने की प्रक्रिया विकसित की गई। प्राकृतिक होने के कारण इस पेय में काफी औषधीय तथा निवारक गुण होते हैं और ये कैलोरीयुक्‍त तथा पौष्टिक होता है।

रसीले फल (फलों का शुद्ध रस – अमरूद, केला, अंगूर, सेब)

रसीले फल मिलावटी पेय के प्राकृतिक विकल्‍प हैं और इन्‍हे उचित तनुता व कार्बनीकरण करके प्रभावी पेयों के रूप में प्रयोग में लाया जाता है। रस में से गूदे वाले भाग को निकालकर पास्‍चुरीकरण तथा कार्बनीकरण द्वारा इसके परिरक्षण में सुविधा होती है। इन फलों को आरटीएस पेय के रूप में बदलने और सान्‍द्रण करने के लिए गूदेदार फल जैसे केला, अमरूद, अंगूर, सेब इत्‍यादि से फलों के शुद्ध रस के उत्‍पादन प्रक्रिया को एन्‍ज़ाइमी जलपघटन (हाड्रालिसिस) द्वारा मानकीकृत किया जाता है।